बिछुड़ कर भी
अनजाने, अनचाहे
समूचे वजूद पर
पसर जाता वह
जिसने
हर छोटी – बड़ी सफलता पर
झूम कर
बाहों में भरा
बहुत लाड़ से सहेजा
हर अभियान में
हमकदम, हमसफर
इतना साझा
रचा – बसा सांसों में जो
कैसे भूलोगे उसे
बार – बार, हर बार
दास्तो के चेहरों में
तब्दील हो जाता
वह शहर
पूरा का पूरा
साथ आयेगा
आपके बाहर
आपके भीतर

