20.1 C
Delhi
Sunday, February 1, 2026

Buy now

Ads

ख़ुश हो ऐ बख़्त कि है आज तेरे सर सेहरा / ग़ालिब

- Advertisement -

ख़ुश हो ऐ बख़्त कि है आज तेरे सर सेहरा
बाँध शहज़ादा जवाँ बख़्त के सर पर सेहरा

क्या ही इस चाँद-से मुखड़े पे भला लगता है
है तेरे हुस्ने-दिल अफ़रोज़ का ज़ेवर सेहरा

सर पे चढ़ना तुझे फबता है पर ऐ तर्फ़े-कुलाह
मुझको डर है कि न छीने तेरा लंबर सेहरा

नाव भर कर ही पिरोए गए होंगे मोती
वर्ना क्यों लाए हैं कश्ती में लगाकर सेहरा

सात दरिया के फ़राहम किए होंगे मोती
तब बना होगा इस अंदाज़ का ग़ज़ भर सेहरा

रुख़ पे दूल्हा के जो गर्मी से पसीना टपका
है रगे-अब्रे-गुहरबार सरासर सेहरा

ये भी इक बेअदबी थी कि क़बा से बढ़ जाए
रह गया आन के दामन के बराबर सेहरा

जी में इतराएँ न मोती कि हमीं हैं इक चीज़
चाहिए फूलों का भी एक मुक़र्रर सेहरा

जब कि अपने में समावें न ख़ुशी के मारे
गूँथें फूलों का भला फिर कोई क्योंकर सेहरा

रुख़े-रौशन की दमक गौहरे-ग़ल्ताँ की चमक
क्यूँ न दिखलाए फ़रोग़े-मह-ओ-अख़्तर सेहरा

तार रेशम का नहीं है ये रगे-अब्रे-बहार
लाएगा ताबे-गिराँबारि-ए गौहर सेहरा

हम सुख़नफ़हम हैं ‘ग़ालिब’ के तरफ़दार नहीं
देखें इस सेहरे से कह दे कोई बढ़कर सेहरा

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
14,700SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles