26.7 C
Delhi
Saturday, March 14, 2026

Buy now

Ads

नयन अबोले

- Advertisement -

इक पल मूँदे इक पल खोले
बोल गए दो नयन अबोले।

बात सहज थी अरथ अबूझे
वह पागल जो इनसे जूझे
जिसका मन हो फूल सुबह का
वह सब जाने उसको सूझे
इक पल बैठे युग दे बैठे
हम ऐसे अनजाने भोले।

जल गहरा था तट बहरा था
फिर भी मन यह रुका न रोके
जिस पर कभी नहीं पहरा था
मगन हुआ वह बंदी होके
दो नयनों पर जनम अनगिने
मिली तराज़ू हमने तौले।

इक पल मूँदे इक पल खोले
बोल गए दो नयन अबोले।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
14,700SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles