20.1 C
Delhi
Wednesday, March 18, 2026

Buy now

Ads

नवगीत – 4

- Advertisement -

कुछ के रुख दक्षिण
कुछ वाम
सूरज के घोड़े हो गए
बेलगाम

थोड़ी- सी तेज हुई हवा
और हिल गई सड़क
लुढ़क गया शहर एक ओर
ख़ामोशी उतर गई केंचुल -सी
माथे के उपर बहने लगा
तेज धार पानी सा शोर
अफ़वाहों के हाथों
चेक की तरह भूनने लग गई
आवारा सुबह और शाम

पत्थर को चीरती हुई सभी
आवाज़ें कहीं गईं मर
गरमाहट सिर्फ राख की
जिन्दा है इस मौसम भर
ताश -महल फिर बनने लग गया
चुस्त लगे होने फिर
हुकुम के गुलाम |

Previous article
Next article

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
14,700SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles