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Friday, March 6, 2026

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नवेदे-अम्न है बेदादे दोस्त जाँ के लिए / ग़ालिब

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नवेदे-अम्न है बेदादे दोस्त जाँ के लिए
रही न तर्ज़े-सितम कोई आसमाँ के लिए

बला से गर मिज़्गाँ-ए-यार तश्ना-ए-ख़ूँ है
रखूँ कुछ अपनी भी मि़ज़्गाँने-ख़ूँफ़िशाँ के लिए

वो ज़िन्दा हम हैं कि हैं रूशनासे-ख़ल्क़- ए -ख़िज्र
न तुम कि चोर बने उम्रे-जाविदाँ के लिए

रहा बला में भी मैं मुब्तिला-ए-आफ़ते-रश्क
बला-ए-जाँ है अदा तेरी इक जहाँ, के लिए

फ़लक न दूर रख उससे मुझे, कि मैं ही नहीं
दराज़-ए-दस्ती-ए-क़ातिल के इम्तिहाँ के लिए

मिसाल यह मेरी कोशिश की है कि मुर्ग़े-असीर
सरे क़फ़स में फ़राहम ख़स आशियाँ के लिए

गदा समझ के वो चुप था मेरी जो शामत आए
उठा और उठ के क़दम, मैंने पासबाँ के लिए

बक़द्रे-शौक़ नहीं ज़र्फ़े-तंगना-ए-ग़ज़ल
कुछ और चाहिए वुसअत मेरे बयाँ के लिए

दिया है ख़ल्क को भी ता उसे नज़र न लगे
बना है ऐश तजम्मल हुसैन ख़ाँ के लिए

ज़बाँ पे बारे-ख़ुदाया ये किसका नाम आया
कि मेरे नुत्क़ ने बोसे मेरी ज़ुबाँ के लिए

नसीरे-दौलत-ओ-दीं और मुईने-मिल्लत-ओ-मुल्क़
बना है चर्ख़े-बरीं जिसके आस्ताँके लिए

ज़माना अह्द में उसके है मह्वे आराइश
बनेंगे और सितारे अब आसमाँ के लिए

वरक़ तमाम हुआ और मदह बाक़ी है
सफ़ीना चाहिए इस बह्रे- बेक़राँ के लिए

अदा-ए-ख़ास से ‘ग़ालिब’ हुआ है नुक़्ता-सरा
सला-ए-आम है याराने-नुक़्ता-दाँ के लिए

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