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Sunday, May 10, 2026

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इम्कान से बाहर अभी आसार से आगे

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इम्कान से बाहर अभी आसार से आगे
महशर है मेरे दीदा-ए-ख़ूँ-बार से आगे

इरफ़ान की हद या मेरे पैकर की शरारत
निकला मेरा साया मेरी दस्तार से आगे

इक ज़िंस-ज़दा नस्ल है तहज़ीब के पीछे
बाज़ार है इक कूचा ओ बाज़ार से आगे

सूरज है शब ओ रोज़ तआक़ुब में वगरना
है और बहुत रात के असरार से आगे

हम लोग मंज़िल के भुलावे के गिरफ़्तार
आसार से पीछे कभी आसार से आगे

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