19.1 C
Delhi
Wednesday, March 18, 2026

Buy now

Ads

उसने मेरे बेगानेपन को ही

- Advertisement -

उसने मेरे
बेगानेपन को ही
छेड़ दिया
घनी उमस में
कभी न उसने
पंखा हाँका है
लसिया गए भात को
देसी घी से छौंका है
दूध मुँहे पाड़े को
माँ से दूर खदेड़ दिया
उसने
नागफनी के जंगल में
कीकर बोया
ख़ुशबू नहीं, चुभन काँटों की
मंज़िल हो गोया
उभर रहे
स्वेटर का पूरा ऊन
उधेड़ दिया
हरियाली केलिए
पेड़ के
हरे तने काटे
बड़े प्यार से पास बुलाकर
जड़े कई चाँटे
उपजाऊ धरती के
बँटवारे का
मेड़ दिया

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
14,700SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles