36.1 C
Delhi
Wednesday, May 13, 2026

Buy now

Ads

इस देश में

- Advertisement -

इस देश में
चीख़
संगीत की धुन बन जाती है
जिस पर थिरकते हैं रईसज़ादे
पबों में

सुन्दर से ड्राइंगरूम में सजती है
द्रौपदी के चीरहरण की
तस्वीर

रोटी से खेलती सत्ता के लिए
भूख चिन्ता का विषय नहीं बनती
मौत की चिता पर सजा दी जाती है
मुआवजे की लकड़ी

किसान की आत्महत्या
आँकड़ों में आपदा की शिकार हो जाती है

धर्म आस्था का विषय नहीं
वोटों की राजनीति में
महन्तों और मुल्लाओं की कठपुतली है

झण्डों के रंग
एक छलावा है
बहाना भर है चेहरे को छुपाने का

तेज़ धूप में पिघलते
भट्टी की आग में जलते
आदमी की शिराओं का रक्त
पानी बनकर
उसके बदन पर चुहचुहाता है
गन्ध फैलाता है हर तरफ

इस लोकतन्त्र में
आदमी की हैसियत रोटी से कम
और भूख उम्र से ज़्यादा है

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
14,700SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles