33.1 C
Delhi
Thursday, May 14, 2026

Buy now

Ads

नाथ हो कोटिन दोष हमारो

- Advertisement -

नाथ हो कोटिन दोष हमारो ।
कहाँ छिपाऊँ, छिपत ना तुमसे, रवि ससि नैन तिहारौ ।। टेक ।।
जल, थल, अनल, अकास, पवन मिलि, पाँचो है रखवारो ।
पल-पल होरि रहत निसी बासर तिहुँ पुर साँझ सकारो ।।
जागत, सोवत, उठत, बैठत करत फिरत व्यवहारो ।
रहत सदा संग, साथ न छोड़त, काल पुरुष बरियारो ।।
बाहर भीतर बैठि रह्यो है, घट-घट बोलनि हारो ।
दुख-सुख पाप-पुन्य के मालिक, निज जन जानि उबारो ।।
कहाँ लाज करि नारि नाह सों जो देखत तन सारो ।
‘लक्ष्मीपति’ के स्वामी केशव भव-नद पार उतारो ।।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
14,700SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles