पेडों पर उछलते कूदते, आमा डगाली खेलते
निगाहें तलाशती रहती
व्ही आकार अंगूठे मोटाई की गोल टहनी
मिलते ही आल्हाद छा जाता
छूट जाते सभी खेल
सावधानी से उसे काटते, छीलते, तराशते
निखारते आकार और देते सुगढ़ता उसे
तलाशते रबर की पुरानी ट्यूब
पेडों पर उछलते कूदते, आमा डगाली खेलते
निगाहें तलाशती रहती
व्ही आकार अंगूठे मोटाई की गोल टहनी
मिलते ही आल्हाद छा जाता
छूट जाते सभी खेल
सावधानी से उसे काटते, छीलते, तराशते
निखारते आकार और देते सुगढ़ता उसे
तलाशते रबर की पुरानी ट्यूब