कल्पना चावला के लिए
नीला नभ
रंग बदल रहा है
काला हुआ जा रहा है
उसका रंग
किन्तु हँस रहा है
तारे टँके जा रहे हैं
एक के बाद एक
….झिलमिला रहा है
उसका चेहरा
अरे !
वो चलता हुआ उल्का-पिण्ड
स्थिर हुआ जा रहा है
…..की तारा हुआ जा रहा है
एक स्निग्ध मुस्कान
होंठों के कोरों पर
नभ मुस्करा रहा है

