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Sunday, February 1, 2026

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तुम को रोना है तो महफ़िल न सजा कर रोना / ईश्वरदत्त अंजुम

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तुमको रोना है तो महफ़िल न सजा कर रोना
दिल का हर दर्द ज़माने से छुपा कर रोना।

वो भी रोएंगे तो रोने का मजा आएगा
रोने वालो कभी उनको भी रुला कर रोना।

रोने धोने के भी दस्तूर हुआ करते हैं
अपने अश्कों में लहू दिल का मिला कर रोना।

जिस को चाहा है दिलो-जान से अब तक तूने
दिल वो तोड़े तो चराग़ो को बुझा कर रोना।

यूँ ही बर्बाद न कर अश्कों को अपने ‘अंजुम’
रूबरू उनको कभी अपने बिठा कर रोना।

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