28.1 C
Delhi
Tuesday, May 12, 2026

Buy now

Ads

हमदम को भूल गया

- Advertisement -

अपनी खुशियों में यों खोया मेरे गम को भूल गया.
वो “मैं” में डूबा है जबसे तबसे “हम” को भूल गया.

डूबे-उतरे-तैरे अब वो नदिया के सँग-सँग खेले,
पर वो नदिया आई जहाँ से उस उद्गम को भूल गया.

चारों ओर फसल लहराती दिखती उसके खेतों में,
जिसने इन खेतों को सींचा उस मौसम को भूल गया.

गंगा-यमुना की महिमा को गाता फिरता है सबसे,
लेकिन इन दोनों के पावन संगम को वो भूल गया.

मेरा कितना दम भरता था वो अपनी हर महफिल में,
हमदम-हमदम कहता था वो अब हमदम को भूल गया.

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
14,700SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles