24.1 C
Delhi
Thursday, May 7, 2026

Buy now

Ads

हरिजन टोली

- Advertisement -

हरिजन टोली में शाम बिना कहे हो जाती है ।
पूरनमासी हो या अमावस
रात के व्यवहार में कोई फ़र्क नहीं पड़ता ।

और जब दिन के साथ चलने के लिए
हाथ-पैर मुश्किल से अभी सीधे भी नहीं हुए रहते,
सुबह हो जाती है ।

कहीं रमिया झाड़ू-झँखा लेकर निकलती है
तो कहीं गोबिन्दी ग़ाली बकती है ।
उसे किसी से हँसी-मजाक अच्छा नहीं लगता
और वह महतो की बात पर मिरच की तरह परपरा उठती है ।

वैसे, कई और भी जवान चमारिनें हैं,
हलखोरिनें और दुसाधिनें हैं,
पर गोबिन्दी की बात कुछ और है —
वह महुवा बीनना ही नहीं,
महुवा का रस लेना भी जानती है ।

उसका आदमी जूता कम, ज़्यादातर आदमी की जबान
सीने लगा है । मुश्किल से इक्कीस साल का होगा,
मगर गोबिन्दी के साल भर के बच्चे का बाप है ।
क्या नाम है? — टेसू ! हाँ, टेसुआ का बाप

गोबिन्दी टेसुआ और उगना के बीच बँटी है
मगर टेसुआ के क़रीब होकर खड़ी है ।

उस बार टोले के साथ-साथ उसका घर भी जला दिया गया था,
और फगुना के बच निकलने पर
उसका एक साल का बालू आग में झोंक दिया गया था।

इस बार गोबिन्दी टेसू को लेकर अपने उगना पर फिरण्ट है,
पर उगना कुछ नहीं सुनता
दीन-दुनिया को ठोकर मार दिन अन्धैत देवी-देवता पर थूकता है,
बड़े-बड़ों की मूँछें उखाड़ता-फिरता है —
और लोगों को दिखा-दिखाकर आग में मूतता है ।

गोबिन्दी को पक्का है :
आग एक बार फिर धधकेगी,
और उसके टेसू को कुछ नहीं होगा —
सारी हरिजन टोली उसकी बाँह पकड़ खड़ी होगी,
और उस आग से लड़ेगी ।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
14,700SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles