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Friday, May 8, 2026

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असफलता के मौन क्षणों में, पथ पर हाथ मलेंगे

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असफलता के मौन क्षणों में, पथ पर हाथ मलेंगे
हम अपने टूटे पैरों से सारी उम्र चलेंगे

ढलते सूरज-सा शरीर है
रग-रग में उठ रही पीर है
रोगी जैसा कर्मवीर है
हम क्षय की सुलगी भट्टी में, सारी उम्र जलेंगे

यहाँ कहाँ रसवन्त कूल हैं,
जीवन के बहुवर्ण फूल हैं,
पग-पग पर चुभ रहे शूल हैं
हम बबूल के कण्टक-वन में सारी उम्र पलेंगे

दिन कैसे उतरे अवनी पर
चढ़ा मैल नृप की करनी पर
फला स्वार्थ टहनी-टहनी पर
हमें अन्धेरे में ठग-ठाकुर सारी उम्र छलेंगे

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