32.1 C
Delhi
Friday, April 24, 2026

Buy now

Ads

गम रो रो के कहता हूँ कुछ उस से अगर अपना

- Advertisement -

गम रो रो के कहता हूँ कुछ उस से अगर अपना
तो हँस के वो बोले है मियाँ फिक्र कर अपना

बातों से कटे किस की भला राह हमारी
गुर्बत के सिवा कोई नहीं हम-सफर अपना

आलम में है घर-घर खुशी ओ ऐश पर उस बिन
मातक-कदा हम को नजर आता है घर अपना

हर बात को बेहतर है छुपाना ही कि ये भी
है ऐब करे कोई जो जाहिर हुनर अपना

क्या क्या उसे देख आती है ‘जुरअत’ हमें हसरत
मायूस जो फिर आता है पैगाम-बर अपना

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
14,700SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles