27.1 C
Delhi
Friday, May 8, 2026

Buy now

Ads

गर्म हवाएँ

- Advertisement -

कलयुग की काली छाया में
अंधी हुईं हवाएँ
रिश्ते-नाते शेष हो गए
रंग लहू के श्वेत हो गए
घर हो गए सराय
मायावी है समय छली
सूझ-बूझ न एक चली
ख़ाक हुए दिन आने वाले
आदिम तम घिरा गली-गली
घुला विषैला क़ायनात में
कोमल सांसें काठ हो गईं
चिंता का चिंतन रहे चलता
आशाएं बेआस हो गईं
कौन सुने अब किसको रोएं
रात-दिवस बोझिल मन ढोएं
शापित जीवन किया काल ने
सिसक मरीं सब याचनाएँ।

Previous article
Next article

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
14,700SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles