32.1 C
Delhi
Thursday, May 7, 2026

Buy now

Ads

घोड़े दौड़ रहे

- Advertisement -

दौड़ाये राजे रजवाड़ों ने
दौड़ाये सामन्तों सुल्तानों ने
दौड़ाये साहुकारों जमींदारों ने
और अभी भी दौड़ाये जा रहे घोड़े

हरेक ऋतुओं में दौड़ रहे घोड़े
हरेक दिशाओं में दौड़ रहे घोड़े
कि उनके थूथनों पे लगा है जिंदा लहू
उनके खुरों में फंसी मासूम चीखें

रौंद रहे खेत-खलिहान
उजाड़ रहे बाग-बगीचे
झुग्गी झोपड़ियों तक को नहीं बख्श रहे
बेलगाम दौड़ रहे घोड़े

आकाश में देवतागण
छतों पे बुद्धिजीवीवृन्द
नाले के किनारे भीड़ भेंड़ दीन-हीन
हाथभर की दूरी से गुजर रहे घोड़े

सर्द और निस्तब्ध रात
नालों टापों के उन्माद का सही वक्त
घोड़ों ने झोंक दी है सारी शक्ति

इधर घोडे़ दौड़ रहे
उधर खुश हैं घुड़सवार
कि जहॉं तक दौड़ जायेंगे घोड़े
वे सारे होंगे उनके अपने
गोया यह घरती, धरती नहीं
उनका रेस ग्राउंड हो !

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
14,700SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles