पिता मेरे कंधे की
एक टहनी टूट गयी है
प्रौढ़ वृक्ष हूँ मैं अब
और मेरी घनी लदी शाखाओं में
कोई छिद्र तक नहीं दिखता
सूरज की महीन रोशनी भी
इसे भेद नहीं पाती
पिता मेरा लदा हुआ होना
मेरी स्थिति का द्योतक है
समय से ज़्यादा
स्वयं के भार में
तुम्हारे दबे होने का अहसास लिए
फलता फूलता हूँ मैं

