35.1 C
Delhi
Sunday, May 10, 2026

Buy now

Ads

याद

- Advertisement -

कभी कभी बहुत याद आती है
इतनी ज़्यादा याद आती है
कि मन करता है कि आँख में
खंज़र कुरेद-कुरेद कर
इस कदर रोऊँ की
यह पूरी दुनिया
बाढ़ की नदी में आए झोंपड़े की तरह
बह जाए
लेकिन
फिर चौकड़ी मारकर बैठता हूँ
और पलटता हूँ पुरानी डायरियाँ

आख़िरकार हर “न”
से परेशान हो उठता हूँ
सोचते-सोचते सर के
टुकड़े-टुकड़े होने लगते हैं
लेकिन ज़रा-सा भी याद नहीं आता
कि आख़िर वह क्या है
जिसकी कभी-कभी
बड़ी बेतरह याद आती है….

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
3,912FollowersFollow
14,700SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles