रहो नज़र में सदा हमारी इसीलिये दिल मचल रहा है
रखें तुम्हें ख़्वाब में सजा कर यही हमारा शग़ल रहा है
चली जो बागे सब जरा सी महक उठे देखो फूल सारे
न जाने है कौन बेरहम वो जो इन को ऐसे कुचल रहा है
तुम्हारी उल्फ़त की धूप में हम बहुत जले कब क़रार पाया
बसी है ख्वाबों में तेरी मूरत उसी से अब दिल बहल रहा है
हमारी आँखों मे ख़्वाब जितने सभी में बस तुम बसे हुए हो
समझ नहीं तुम ही इसको पाये इसी से आँसू निकल रहा है
करीब आ कर भी दूर रहना अजब तुम्हारी हैं ये अदायें
उसे समझना हुआ न आसां तुम्हारे मन मे जो चल रहा है

