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Sunday, April 26, 2026

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इतना बतला के मुझे हरजाई हूँ मैं यार कि तू

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इतना बतला के मुझे हरजाई हूँ मैं यार कि तू
मैं हर इक शख्स से रखता हूँ सरोकार के तू

कम-सबाती मेरी हरदम है मुखातिब ब-हबाब
देखें तो पहले हम उस बहर से हों पार के तू

ना-तवानी मेरी गुलशन में ये ही बहसें है
देखें ऐ निकहत-ए-गुल हम हैं सुबुक-बार के तू

दोस्ती कर के जो दुश्मन हुआ तू ‘जुरअत’ का
बे-वफा वो है फिर ऐ शोख सितम-गार के तू

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